‘हम AI के जमाने में हैं…’, सोनम वागंचुक की स्पीच के ट्रांस्क्रिप्शन को लेकर केंद्र पर भड़का SC​on February 17, 2026 at 10:58 am

<p style=”text-align: justify;”>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी, 2026) को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्पीच के ट्रांसक्रिप्शन को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के दौर में अनुवाद बिल्कुल सटीक होना चाहिए. इसी स्पीच के लिए सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि सरकार सोनम वांगचुक के बयानों की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे, क्योंकि उनके वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि स्पीच में कुछ ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं. बेंच ने कहा, ‘मिस्टर सॉलिसिटर, हमें भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए, जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग है. हम फैसला करेंगे. उन्होंने जो कहा है, उसकी वास्तविक प्रतिलिपि होनी चाहिए. आपके पास अपने कारण हो सकते हैं.'</p>
<p style=”text-align: justify;”>कोर्ट ने कहा, ‘कम से कम वांगचुक ने जो कहा, उसका सही अनुवाद होना चाहिए&hellip;… आपका अनुवाद 7-8 मिनट का है, जबकि भाषण सिर्फ तीन मिनट का ही है. हम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत सटीकता होनी चाहिए.’ कपिल सिब्बल ने अनुवाद पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा&hellip;… और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा&hellip;… यह वाक्य कहां से आ गया? यह एक बहुत ही अनोखा नजरबंदी आदेश है- आप ऐसी बात पर भरोसा कर रहे हैं जो मौजूद ही नहीं है और फिर कहते हैं कि यह व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है.'</p>
<p style=”text-align: justify;”>केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए एक विभाग है और कहा, ‘हम इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं.’ इस मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर से होगी. केंद्र ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सोनम वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वह स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक की नजरबंदी का आदेश जारी किया गया था, वे अब भी बने हुए हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा करना संभव नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका), 1980 के तहत उनकी (वांगचुक की) नजरबंदी को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है.</p>

​<p style=”text-align: justify;”>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी, 2026) को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्पीच के ट्रांसक्रिप्शन को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के दौर में अनुवाद बिल्कुल सटीक होना चाहिए. इसी स्पीच के लिए सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि सरकार सोनम वांगचुक के बयानों की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे, क्योंकि उनके वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि स्पीच में कुछ ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं. बेंच ने कहा, ‘मिस्टर सॉलिसिटर, हमें भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए, जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग है. हम फैसला करेंगे. उन्होंने जो कहा है, उसकी वास्तविक प्रतिलिपि होनी चाहिए. आपके पास अपने कारण हो सकते हैं.'</p>
<p style=”text-align: justify;”>कोर्ट ने कहा, ‘कम से कम वांगचुक ने जो कहा, उसका सही अनुवाद होना चाहिए&hellip;… आपका अनुवाद 7-8 मिनट का है, जबकि भाषण सिर्फ तीन मिनट का ही है. हम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत सटीकता होनी चाहिए.’ कपिल सिब्बल ने अनुवाद पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा&hellip;… और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा&hellip;… यह वाक्य कहां से आ गया? यह एक बहुत ही अनोखा नजरबंदी आदेश है- आप ऐसी बात पर भरोसा कर रहे हैं जो मौजूद ही नहीं है और फिर कहते हैं कि यह व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है.'</p>
<p style=”text-align: justify;”>केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए एक विभाग है और कहा, ‘हम इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं.’ इस मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर से होगी. केंद्र ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सोनम वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वह स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक की नजरबंदी का आदेश जारी किया गया था, वे अब भी बने हुए हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा करना संभव नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका), 1980 के तहत उनकी (वांगचुक की) नजरबंदी को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है.</p>  

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