लोढा डेवलपर्स धोखाधड़ी केस, ED ने पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र नरपतमल को किया अरेस्ट, 8 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा​on February 14, 2026 at 1:41 pm

<p style=”text-align: justify;”>प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 12 फरवरी, 2026 को राजेंद्र नरपतमल लोढा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी M/s लोढा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ की गई धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के सिलसिले में हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>शुक्रवार, 13 फरवरी को आरोपी को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने मामले की गहराई से जांच के लिए उसे 8 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br />यह कार्रवाई मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई विभिन्न FIR के आधार पर शुरू की गई है. राजेंद्र लोढा और अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आधिकारिक पद का दुरुपयोग, संपत्ति की अनधिकृत बिक्री और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप हैं. आरोप है कि इन गतिविधियों के कारण लोढा डेवलपर्स लिमिटेड को 100 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे</strong><br />ED की जांच में यह सामने आया कि राजेंद्र लोढा कंपनी के फंड और संपत्तियों को ठिकाने लगाने (Siphoning) में शामिल थे.&nbsp;बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अनुमति के बिना कंपनी की अचल संपत्तियों को अपने से जुड़े व्यक्तियों और ‘प्रॉक्सि’ संस्थाओं को बाजार दर से बेहद कम कीमतों पर बेचा. जमीन खरीद के लिए फर्जी ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) तैयार किए, जिसमें जमीन की कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गईं. बाद में इस बढ़ी हुई रकम को कैश के रूप में विक्रेताओं के माध्यम से वापस लेकर गबन किया गया.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति जब्त</strong><br />इससे पहले, 12 नवंबर 2025 को ED ने मुंबई क्षेत्र के 14 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान 88 करोड़ रुपये की चल संपत्ति (कैश, बैंक बैलेंस और FD) के साथ-साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और करोड़ों की अचल संपत्तियों के विवरण जब्त या फ्रीज किए गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, ये सबूत राजेंद्र लोढा के खिलाफ चल रही जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए हैं. फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और ED अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.</p>

​<p style=”text-align: justify;”>प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 12 फरवरी, 2026 को राजेंद्र नरपतमल लोढा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी M/s लोढा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ की गई धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के सिलसिले में हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>शुक्रवार, 13 फरवरी को आरोपी को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने मामले की गहराई से जांच के लिए उसे 8 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br />यह कार्रवाई मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई विभिन्न FIR के आधार पर शुरू की गई है. राजेंद्र लोढा और अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आधिकारिक पद का दुरुपयोग, संपत्ति की अनधिकृत बिक्री और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप हैं. आरोप है कि इन गतिविधियों के कारण लोढा डेवलपर्स लिमिटेड को 100 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे</strong><br />ED की जांच में यह सामने आया कि राजेंद्र लोढा कंपनी के फंड और संपत्तियों को ठिकाने लगाने (Siphoning) में शामिल थे.&nbsp;बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अनुमति के बिना कंपनी की अचल संपत्तियों को अपने से जुड़े व्यक्तियों और ‘प्रॉक्सि’ संस्थाओं को बाजार दर से बेहद कम कीमतों पर बेचा. जमीन खरीद के लिए फर्जी ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) तैयार किए, जिसमें जमीन की कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गईं. बाद में इस बढ़ी हुई रकम को कैश के रूप में विक्रेताओं के माध्यम से वापस लेकर गबन किया गया.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति जब्त</strong><br />इससे पहले, 12 नवंबर 2025 को ED ने मुंबई क्षेत्र के 14 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान 88 करोड़ रुपये की चल संपत्ति (कैश, बैंक बैलेंस और FD) के साथ-साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और करोड़ों की अचल संपत्तियों के विवरण जब्त या फ्रीज किए गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, ये सबूत राजेंद्र लोढा के खिलाफ चल रही जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए हैं. फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और ED अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.</p>  

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