नाबालिग बच्चे ने एक्सिडेंट किया तो पैरेंट्स को क्यों मिलती है सजा? जानें कानून की बात​on February 18, 2026 at 1:12 pm

<p style=”text-align: justify;”><strong>Motor Vehicle Act Rules:&nbsp;</strong>हाल ही में दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया. तेज रफ्तार स्कॉर्पियो चला रहे एक नाबालिग ने बाइक सवार 23 साल के युवक को टक्कर मार दी. जिसकी मौके पर ही मौत हो गई. बताया गया कि कार में बैठा नाबालिग स्पीड रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहा था और उसी दौरान नियंत्रण खो बैठा.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>हादसे के बाद बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जब गाड़ी नाबालिग चला रहा था. तो उसके पिता पर कार्रवाई क्यों हो रही है. पुलिस ने पिता के खिलाफ भी चार्जशीट की बात कही है. ऐसे मामलों में कानून सिर्फ ड्राइवर को नहीं. बल्कि जिम्मेदारी तय करने की पूरी प्रोसेस को देखता है. चलिए आपको बताते हैं इसे लेकर नियम क्या कहते हैं.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>पैरेंट्स की जिम्मेदारी क्यों होती है?&nbsp;</strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>भारत में अगर कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है या किसी हादसे में शामिल होता है. तो मामला सीधे मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दर्ज होता है. इस कानून की धारा 199A साफ कहती है कि नाबालिग के वाहन चलाने की जिम्मेदारी उसके अभिभावक या वाहन मालिक पर मानी जाएगी. कानून का नजरिया यह है कि कम उम्र का व्यक्ति कानूनी तौर पर ड्राइविंग के लिए एलिजिबल नहीं है. इसलिए उस तक गाड़ी कैसे पहुंची.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>अगर यह साबित हो जाए कि वाहन जानबूझकर नाबालिग को दिया गया था या निगरानी में लापरवाही बरती गई. तो अभिभावक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है. इसमें तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इसके साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या कैंसिल भी किया जा सकता है. इसका मकसद सिर्फ सजा देना नहीं. बल्कि परिवारों को जिम्मेदार बनाना है जिससे नाबालिगों को ड्राइविंग से रोका जा सके.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>इस वजह से नहीं हो पाती गिरफ्तारी</strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>ऐसे मामलों में कानून सख्त जरूर है. लेकिन हर केस में तुरंत गिरफ्तारी हो ऐसा जरूरी नहीं. जांच एजेंसियां पहले यह समझने की कोशिश करती हैं कि घटना किन परिस्थितियों में हुई. क्या पैरेंट्स ने खुद चाबी सौंपी थी या नाबालिग ने बिना जानकारी वाहन निकाल लिया? क्या पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं? क्या परिवार ने रोकने की कोशिश की थी?&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>कई मामलों में परिजन यह दलील देते हैं कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बच्चा गाड़ी लेकर बाहर गया है. अगर जांच में यह सामने आ जाए कि सीधे तौर पर उनकी लापरवाही साबित नहीं होती. तो गिरफ्तारी से राहत मिल सकती है. हालांकि जुर्माना के साथ कानूनी प्रोसेस का सामना करना पड़ सकता है.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>यह भी पढ़ें: <a href=”https://www.abplive.com/photo-gallery/utility-news/credit-card-using-tips-is-it-better-to-wait-until-the-due-date-to-pay-your-credit-card-bill-or-to-pay-it-early-know-the-right-way-3090986″>क्रेडिट कार्ड बिल भरने के लिए ड्यू डेट तक रुकना ठीक है या पहले पेमेंट करना सही? जान लें काम की बात</a></strong></p>

​<p style=”text-align: justify;”><strong>Motor Vehicle Act Rules:&nbsp;</strong>हाल ही में दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया. तेज रफ्तार स्कॉर्पियो चला रहे एक नाबालिग ने बाइक सवार 23 साल के युवक को टक्कर मार दी. जिसकी मौके पर ही मौत हो गई. बताया गया कि कार में बैठा नाबालिग स्पीड रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहा था और उसी दौरान नियंत्रण खो बैठा.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>हादसे के बाद बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जब गाड़ी नाबालिग चला रहा था. तो उसके पिता पर कार्रवाई क्यों हो रही है. पुलिस ने पिता के खिलाफ भी चार्जशीट की बात कही है. ऐसे मामलों में कानून सिर्फ ड्राइवर को नहीं. बल्कि जिम्मेदारी तय करने की पूरी प्रोसेस को देखता है. चलिए आपको बताते हैं इसे लेकर नियम क्या कहते हैं.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>पैरेंट्स की जिम्मेदारी क्यों होती है?&nbsp;</strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>भारत में अगर कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है या किसी हादसे में शामिल होता है. तो मामला सीधे मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दर्ज होता है. इस कानून की धारा 199A साफ कहती है कि नाबालिग के वाहन चलाने की जिम्मेदारी उसके अभिभावक या वाहन मालिक पर मानी जाएगी. कानून का नजरिया यह है कि कम उम्र का व्यक्ति कानूनी तौर पर ड्राइविंग के लिए एलिजिबल नहीं है. इसलिए उस तक गाड़ी कैसे पहुंची.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>अगर यह साबित हो जाए कि वाहन जानबूझकर नाबालिग को दिया गया था या निगरानी में लापरवाही बरती गई. तो अभिभावक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है. इसमें तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इसके साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या कैंसिल भी किया जा सकता है. इसका मकसद सिर्फ सजा देना नहीं. बल्कि परिवारों को जिम्मेदार बनाना है जिससे नाबालिगों को ड्राइविंग से रोका जा सके.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>इस वजह से नहीं हो पाती गिरफ्तारी</strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>ऐसे मामलों में कानून सख्त जरूर है. लेकिन हर केस में तुरंत गिरफ्तारी हो ऐसा जरूरी नहीं. जांच एजेंसियां पहले यह समझने की कोशिश करती हैं कि घटना किन परिस्थितियों में हुई. क्या पैरेंट्स ने खुद चाबी सौंपी थी या नाबालिग ने बिना जानकारी वाहन निकाल लिया? क्या पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं? क्या परिवार ने रोकने की कोशिश की थी?&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>कई मामलों में परिजन यह दलील देते हैं कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बच्चा गाड़ी लेकर बाहर गया है. अगर जांच में यह सामने आ जाए कि सीधे तौर पर उनकी लापरवाही साबित नहीं होती. तो गिरफ्तारी से राहत मिल सकती है. हालांकि जुर्माना के साथ कानूनी प्रोसेस का सामना करना पड़ सकता है.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>यह भी पढ़ें: <a href=”https://www.abplive.com/photo-gallery/utility-news/credit-card-using-tips-is-it-better-to-wait-until-the-due-date-to-pay-your-credit-card-bill-or-to-pay-it-early-know-the-right-way-3090986″>क्रेडिट कार्ड बिल भरने के लिए ड्यू डेट तक रुकना ठीक है या पहले पेमेंट करना सही? जान लें काम की बात</a></strong></p>  

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